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पैलेस ऑन व्हील्स का 43 साल पुराना नियम टूटा, जानिए क्या बदला

May 13, 2026 Source: Veridhar

पैलेस ऑन व्हील्स का 43 साल पुराना नियम टूटा, जानिए क्या बदला
Palace on Wheels पर आधारित यह खबर राजस्थान पर्यटन और भारतीय लग्ज़री रेल यात्रा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है। यह प्रतिष्ठित ट्रेन, जो आमतौर पर सितंबर से अप्रैल के बीच संचालित होती है, इस बार अपनी 43 साल पुरानी परंपरा तोड़ते हुए पहली बार मई महीने में भी चलाई जा रही है। यह निर्णय बढ़ती यात्री मांग और विशेष चार्टर बुकिंग के कारण लिया गया है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, इस बार यात्रियों की दिलचस्पी में लगभग 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके चलते गर्मी के मौसम में भी संचालन संभव हो पाया है। पहले मई महीने में राजस्थान की अत्यधिक गर्मी के कारण इस ट्रेन की सेवाएँ बंद रहती थीं, लेकिन अब बदलते ट्रैवल ट्रेंड और लग्ज़री अनुभव की बढ़ती मांग ने इस परंपरा को बदल दिया है। यह ट्रेन 1982 में राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) और भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई थी। इसे “चलता-फिरता महल” कहा जाता है क्योंकि इसका इंटीरियर राजपूताना शाही दरबारों की झलक देता है। इसमें रेशमी सजावट, भव्य केबिन, निजी बटलर सेवा और पारंपरिक आतिथ्य जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। यात्रियों को यहाँ “खिदमतगार” नामक स्टाफ की सेवा मिलती है, जो शाही अनुभव को और खास बनाता है। इस ट्रेन का 7 रात और 8 दिन का रूट नई दिल्ली के सफदरजंग स्टेशन से शुरू होकर राजस्थान के प्रमुख शाही शहरों जैसे Jaipur, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुर और आगरा तक जाता है। यात्रा के दौरान यात्री किले, महल, रेगिस्तानी सफारी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक नृत्य और ताजमहल का सूर्योदय जैसे अनुभवों का आनंद लेते हैं। बुकिंग प्रक्रिया राजस्थान पर्यटन के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से की जाती है, जहाँ यात्री यात्रा का मौसम, केबिन श्रेणी और यात्रियों की संख्या चुन सकते हैं। किराया केबिन के प्रकार जैसे डीलक्स, सुइट और प्रेसिडेंशियल सुइट के अनुसार बदलता है। इसके साथ ही रद्दीकरण नीति भी निर्धारित है, जिसमें समय के अनुसार 10% से लेकर 100% तक शुल्क लागू हो सकता है। इस फैसले को भारत में लग्ज़री रेल पर्यटन के नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। यह कदम न केवल राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देगा, बल्कि “स्लो ट्रैवल” और अनुभव आधारित पर्यटन को भी नई दिशा देगा।