India
जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर पुनर्विचार की मांग की
May 10, 2026 Source: Veridhar
कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने ग्रेट निकोबार आइलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरण मंत्री Bhupender Yadav को पत्र लिखकर इस परियोजना पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि इस प्रोजेक्ट को तुरंत रोका जाए, इसके मौजूदा डिजाइन पर पुनर्विचार किया जाए और पर्यावरणीय प्रभाव का दोबारा गहन आकलन किया जाए।
इससे पहले कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर Sonia Gandhi और Rahul Gandhi भी चिंता जता चुके हैं। रमेश ने अपने पत्र में दावा किया कि यह परियोजना ग्रेट निकोबार द्वीप के अत्यंत संवेदनशील और अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
पर्यावरणीय प्रभाव और EIA पर सवाल
रमेश ने कहा कि जिस पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) के आधार पर इस परियोजना को मंजूरी दी गई है, वह “अपर्याप्त और अधूरी” है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया केवल कुछ सीमित बेसलाइन डेटा पर आधारित रही, जो वैज्ञानिक दृष्टि से पर्याप्त नहीं है। उन्होंने इसे “EIA प्रक्रिया का मजाक” तक कहा।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस क्षेत्र की बायोडायवर्सिटी बेहद अनोखी है और समय-समय पर यहां नई प्रजातियों की खोज होती रहती है। ऐसे में एक कमजोर आकलन के आधार पर बड़े पैमाने पर विकास कार्य करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
सुरक्षा और विकास पर बहस
रमेश ने यह भी कहा कि कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार देश की रणनीतिक जरूरतों को बिना पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाए भी पूरा किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि पर्यावरणीय विनाश के बिना भी वैकल्पिक योजनाएं संभव हैं।
साथ ही उन्होंने सरकार द्वारा पेड़ लगाने को “मुआवजा” बताने की अवधारणा को भी अव्यावहारिक करार दिया।
कानूनी और प्रक्रियात्मक चिंताएं
पत्र में पर्यावरण मंत्रालय की 2019 की CRZ अधिसूचना, पोर्ट्स के लिए EIA मैनुअल और अन्य नियमों का हवाला देते हुए कहा गया कि कम से कम कई मौसमों का विस्तृत अध्ययन जरूरी होता है, जो इस मामले में नहीं किया गया।
उन्होंने पूर्व पर्यावरण मंत्री Prakash Javadekar के 2015 के रुख का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने अधूरी EIA रिपोर्ट के आधार पर परियोजनाओं को मंजूरी देने से इनकार किया था।
NGT आदेश और पारदर्शिता पर सवाल
रमेश ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 2023 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी में कई कमियां पाई गई थीं। इसके बावजूद हाई पावर कमेटी (HPC) की रिपोर्ट को गोपनीय बताया जाना उन्होंने “पारदर्शिता के खिलाफ” करार दिया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब मूल EIA प्रक्रिया सार्वजनिक थी, तो पुनर्विचार रिपोर्ट को गोपनीय क्यों रखा जा रहा है।
निष्कर्ष
रमेश ने अपने पत्र में दोहराया कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर गंभीर पुनर्विचार जरूरी है। उनका कहना है कि बिना मजबूत वैज्ञानिक अध्ययन और पारदर्शी प्रक्रिया के इतने संवेदनशील क्षेत्र में बड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।