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भारत-पाक चार दिन के टकराव पर मुनीर का बड़ा बयान
May 10, 2026 Source: Veridhar
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल Asim Munir ने भारत के साथ पिछले वर्ष हुए चार दिन के सैन्य तनाव को “दो विचारधाराओं की लड़ाई” बताया है। उन्होंने यह बयान रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर में एक समारोह के दौरान दिया, जो इस संघर्ष की पहली वर्षगांठ पर आयोजित किया गया था। इस संघर्ष को पाकिस्तान में “मरका-ए-हक” नाम दिया गया है।
अपने संबोधन में मुनीर ने दावा किया कि इस पूरे टकराव के दौरान पाकिस्तान की सैन्य रणनीति भारत की तुलना में अधिक “बेहतर और प्रभावी” थी। उन्होंने इसे केवल दो देशों या सेनाओं के बीच का पारंपरिक युद्ध नहीं, बल्कि विचारधारात्मक संघर्ष बताया, जिसमें पाकिस्तान ने “राष्ट्रीय एकता और सैन्य शक्ति” के साथ प्रतिक्रिया दी।
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में भारत द्वारा शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर रहा। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में Operation Sindoor के तहत 7 मई 2025 को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। भारतीय दावे के अनुसार, इन हमलों में लगभग 100 आतंकवादी मारे गए थे।
इसके बाद तनाव तेजी से बढ़ा और दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव शुरू हो गया। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन भारतीय सेना ने उसके कई हमलों को नाकाम कर दिया। स्थिति बिगड़ने के बाद दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हॉटलाइन पर बातचीत हुई और अंततः 10 मई 2025 को संघर्ष विराम पर सहमति बनी।
इस पूरे घटनाक्रम पर बोलते हुए मुनीर ने आरोप लगाया कि भारत ने 6 से 10 मई के बीच पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया था। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ने 26 ठिकानों पर जवाबी हमले किए, हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने अमेरिका के माध्यम से संघर्ष विराम का प्रस्ताव दिया था, जिसे पाकिस्तान ने शांति के हित में स्वीकार किया। हालांकि भारत का पक्ष इससे अलग है, जिसके अनुसार युद्धविराम दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत से तय हुआ था।
मुनीर ने भविष्य के युद्धों को “बहु-क्षेत्रीय” (multi-domain) बताते हुए कहा कि पाकिस्तान तकनीक, हथियार प्रणाली और प्रशिक्षण के माध्यम से अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत कर रहा है। उन्होंने हैंगोर-क्लास पनडुब्बियों, नई रॉकेट फोर्स और आधुनिक लड़ाकू विमानों के विकास का भी उल्लेख किया।
भारत ने इस पूरे अभियान को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई बताया और पहलगाम हमले के जवाब में अपनी सुरक्षा नीति को सही ठहराया था, जिसे Pahalgam attack के रूप में जाना जाता है।