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केरल कांग्रेस में सियासी भूचाल, सतीशन के बयान से बढ़ी तकरार

May 7, 2026 Source: Veridhar

केरल कांग्रेस में सियासी भूचाल, सतीशन के बयान से बढ़ी तकरार
केरल में कांग्रेस नीत यूडीएफ की बड़ी जीत के बाद जहां सरकार गठन की तैयारियां तेज हैं, वहीं मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर खींचतान भी खुलकर सामने आने लगी है। इस बीच कांग्रेस नेता और मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे वी डी सतीशन अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। एक इंटरव्यू के दौरान सतीशन ने कहा कि प्रशासनिक अनुभव मुख्यमंत्री बनने के लिए सबसे बड़ा पैमाना नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वी एस अच्युतानंदन के पास भी पहले प्रशासनिक अनुभव नहीं था। इसी क्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए कहा कि जब मोदी पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तब उनके पास भी कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं था और वे केवल एक पार्टी ऑर्गेनाइज़र के रूप में काम कर रहे थे। सतीशन का यह बयान अब कांग्रेस के भीतर बहस का कारण बन गया है। पार्टी के कई कार्यकर्ता और समर्थक सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में मोदी का उदाहरण देकर अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश कांग्रेस समर्थकों को पसंद नहीं आ रही। सोशल मीडिया पर इसे “रेड फ्लैग” तक बताया जा रहा है। हालांकि सतीशन समर्थकों का मानना है कि उन्होंने केवल यह बताने की कोशिश की कि नेतृत्व क्षमता प्रशासनिक अनुभव से बड़ी चीज होती है। उनके समर्थक यह भी याद दिला रहे हैं कि 2021 की हार के बाद पार्टी संगठन को मजबूत करने और यूडीएफ को सत्ता तक पहुंचाने में सतीशन की बड़ी भूमिका रही है। 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में यूडीएफ ने 102 सीटें जीतकर शानदार वापसी की है, जबकि एलडीएफ 35 सीटों पर सिमट गया। परावूर सीट से बड़ी जीत दर्ज करने वाले सतीशन को इस सफलता का मुख्य चेहरा माना जा रहा है। इसी वजह से मुख्यमंत्री पद पर उनका दावा मजबूत बताया जा रहा है। इस बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि अगर सतीशन को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया तो वे मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होंगे और केवल विधायक के रूप में काम करेंगे। बताया जा रहा है कि उन्होंने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपना लिया है। वहीं सोशल मीडिया पर “राहुल गांधी, वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाओ” जैसे अभियान भी तेजी से चल रहे हैं, जिनमें हजारों समर्थक हिस्सा ले रहे हैं। कुल मिलाकर, सरकार गठन से पहले कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर तनाव साफ दिखाई दे रहा है और सतीशन का बयान इस बहस को और ज्यादा गर्मा गया है।