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‘जिन्न का साया’ हटाने के नाम पर हैवानियत, आरोपी मौलवी की जमानत रद्द
May 7, 2026 Source: Veridhar
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐसे मामले में आरोपी मौलवी को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया, जिसमें उस पर आध्यात्मिक इलाज और ‘जिन्न के साये’ से मुक्ति दिलाने के बहाने नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न का आरोप है। अदालत ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि आरोपी ने पीड़िता और उसके परिवार के विश्वास का गलत फायदा उठाया।
मामला दिल्ली के प्रेम नगर थाना क्षेत्र का है, जहां आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 376 और POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि ऐसे मामलों में पीड़िता की सुरक्षा और न्याय प्रक्रिया पर संभावित प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता के परिवार ने स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों की सलाह पर आरोपी मौलवी से संपर्क किया था। आरोपी ने खुद को झाड़-फूंक और आध्यात्मिक उपचार करने वाला बताया और दावा किया कि वह लड़की के ऊपर कथित ‘जिन्न’ या बुरी आत्मा का असर खत्म कर सकता है। आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने लड़की का यौन शोषण किया।
शिकायत में कहा गया कि आरोपी ने परिवार को कमरे से बाहर भेजकर लड़की से कहा कि उसके शरीर से ‘जिन्न’ निकालने के लिए अश्लील हरकतें जरूरी हैं। इसके बाद उसने कथित तौर पर दुष्कर्म किया और पीड़िता को घटना के बारे में किसी को न बताने की धमकी दी। बाद में लड़की ने डर और दबाव के बावजूद अपनी मां को पूरी घटना बताई, जिसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी 2019 से न्यायिक हिरासत में है और ट्रायल काफी आगे बढ़ चुका है। साथ ही यह भी कहा गया कि मुख्य गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, इसलिए गवाहों को प्रभावित करने की संभावना कम है। हालांकि अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता की गवाही FIR के आरोपों का समर्थन करती है और मामला अत्यंत संवेदनशील है।
रिकॉर्ड और गवाहियों की समीक्षा के बाद हाईकोर्ट ने माना कि इस स्तर पर आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गवाहों के बयानों में कथित विरोधाभासों की विस्तृत जांच ट्रायल के दौरान की जाएगी। इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।