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तमिलनाडु में चौंकाने वाला ट्विस्ट, DMK-AIADMK साथ आ सकते हैं

May 7, 2026 Source: Veridhar

तमिलनाडु में चौंकाने वाला ट्विस्ट, DMK-AIADMK साथ आ सकते हैं
तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। थलपति विजय की पार्टी TVK ने हाल ही में 108 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में खुद को स्थापित किया है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से दूर रहने के कारण सरकार गठन की राह आसान नहीं दिख रही है। बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है, जबकि कांग्रेस के समर्थन के बाद भी TVK का कुल आंकड़ा 113 सीटों तक ही पहुंच पाया है, जो अभी भी बहुमत से कम है। इसी राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है कि राज्य की दो पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पार्टियां DMK और AIADMK एक संभावित गठबंधन पर विचार कर रही हैं। अगर यह गठबंधन होता है, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है, क्योंकि इन दोनों दलों के बीच दशकों से तीखी राजनीतिक दुश्मनी रही है। सूत्रों के अनुसार, AIADMK और DMK के बीच शुरुआती बातचीत चल रही है, हालांकि अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। यदि दोनों दल एक साथ आते हैं, तो उनके पास बहुमत से अधिक सीटें हो सकती हैं, जिससे वे आसानी से सरकार बना सकते हैं। एक संभावित स्थिति में DMK और AIADMK के संयुक्त गठबंधन के पास लगभग 120 सीटें तक हो सकती हैं, जो बहुमत से काफी अधिक है। एक अन्य संभावित परिदृश्य यह भी बताया जा रहा है कि यदि कांग्रेस DMK गठबंधन से अलग हो जाती है, तो AIADMK के साथ अन्य छोटे दल जैसे PMK भी मिलकर सरकार बनाने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे में भी उनके पास बहुमत के लिए पर्याप्त संख्या (लगभग 119 सीटें) हो सकती है। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का मुख्य केंद्र थलपति विजय और उनकी पार्टी TVK को सरकार बनाने से रोकना माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि DMK और AIADMK वास्तव में साथ आते हैं, तो यह केवल सत्ता संतुलन को ही नहीं बदल देगा, बल्कि तमिलनाडु की दशकों पुरानी राजनीतिक दुश्मनी की परंपरा को भी चुनौती देगा। इतिहास में DMK और AIADMK के बीच टकराव बेहद तीखा रहा है, जिसमें व्यक्तिगत और राजनीतिक स्तर पर कई बड़े विवाद शामिल रहे हैं। इसलिए इस तरह का संभावित गठबंधन न केवल अप्रत्याशित है, बल्कि राज्य की राजनीति के लिए एक अभूतपूर्व मोड़ भी साबित हो सकता है। कुल मिलाकर, तमिलनाडु की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां आने वाले दिनों में गठबंधन की रणनीतियां राज्य की सत्ता का भविष्य तय कर सकती हैं।