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अर्जुन कपूर केस: सोशल मीडिया कंटेंट हटाने के आदेश जारी
May 4, 2026 Source: Veridhar
दिल्ली हाई कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन कपूर को उनके व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) के मामले में बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनके नाम, छवि, आवाज और पहचान के व्यावसायिक दुरुपयोग पर अंतरिम सुरक्षा प्रदान करते हुए स्पष्ट किया कि बिना अनुमति किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा उनका उपयोग नहीं किया जा सकता।
यह फैसला न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने अर्जुन कपूर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कई सोशल मीडिया अकाउंट्स, वेबसाइट्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उनके नाम और तस्वीरों का गलत और अनधिकृत उपयोग किया जा रहा है। इसमें उनके नाम पर फर्जी प्रचार, सामान की बिक्री, और कार्यक्रमों के आयोजन जैसे मामले शामिल थे।
कोर्ट ने इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई कि इंटरनेट पर अर्जुन कपूर से जुड़ा कई आपत्तिजनक और फर्जी कंटेंट मौजूद है। इसमें डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड (बदली हुई) तस्वीरें और एआई द्वारा बनाई गई फर्जी छवियां शामिल हैं। कुछ कंटेंट में उन्हें असामान्य या अपमानजनक परिस्थितियों में दिखाया गया, जैसे जानवरों के साथ जोड़ना या असंबंधित गतिविधियों में शामिल दिखाना। अदालत ने इसे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने टेक कंपनियों गूगल और मेटा को निर्देश दिया कि वे ऐसे सभी आपत्तिजनक, मानहानिकारक और अनधिकृत कंटेंट को तुरंत हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। साथ ही, जिन अकाउंट्स के माध्यम से यह सामग्री फैलाई जा रही है, उनकी जानकारी भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति से जुड़ा हर कंटेंट केवल इस आधार पर नहीं हटाया जा सकता कि उसमें उनका नाम या छवि शामिल है। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को आलोचना और जांच का सामना करना पड़ता है, लेकिन यदि कोई सामग्री अवैध, मानहानिकारक या व्यावसायिक रूप से अनधिकृत है, तो उस पर कार्रवाई जरूरी है।
अर्जुन कपूर की ओर से दायर याचिका में बताया गया था कि कुछ लोग उनके नाम पर फर्जी बुकिंग कर रहे हैं और उनके नाम व फोटो का उपयोग करके अवैध तरीके से कारोबार कर रहे हैं। अदालत ने माना कि इस तरह का दुरुपयोग व्यक्ति की छवि और सम्मान को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
इस आदेश के बाद अब अर्जुन कपूर के व्यक्तित्व अधिकारों को कानूनी संरक्षण मिल गया है और किसी भी प्रकार के व्यावसायिक उपयोग के लिए उनकी अनुमति अनिवार्य होगी।