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चीन की 5 कंपनियों पर अमेरिका की कार्रवाई, ईरानी तेल खरीद बना कारण
May 3, 2026
अमेरिका और चीन के बीच ईरानी तेल व्यापार को लेकर तनाव एक बार फिर गहरा गया है। अमेरिका ने ईरान से तेल खरीदने के आरोप में चीन की पांच बड़ी पेट्रोकेमिकल कंपनियों पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन कंपनियों को अमेरिका ने अपनी “स्पेशली डिज़िग्नेटेड नेशनल्स (SDN)” सूची में शामिल किया है, जिसके तहत उनकी अमेरिका स्थित संपत्तियां फ्रीज की जा सकती हैं और अमेरिकी कंपनियों के साथ किसी भी प्रकार का व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाता है।
इस कार्रवाई को वाशिंगटन की ओर से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसके तेल निर्यात को सीमित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिका का आरोप है कि ये चीनी कंपनियां अप्रत्यक्ष रूप से ईरानी तेल खरीदकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रही थीं।
दूसरी ओर, इस कदम के जवाब में चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए घरेलू कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन न करने का निर्देश दिया है। यह फैसला चीन की नई कानूनी व्यवस्था “ब्लॉकिंग स्टैच्यूट” के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य विदेशी देशों द्वारा लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों के प्रभाव को चीन में निष्प्रभावी करना है। यह कदम चीन की ओर से न केवल राजनीतिक बल्कि कानूनी जवाबी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, जिन पांच कंपनियों को इस आदेश से संरक्षण मिला है, उनमें हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनिंग कंपनी लिमिटेड, शेडोंग शौगुआंग लुकिंग पेट्रोकेमिकल कंपनी लिमिटेड, शेडोंग जिनचेंग पेट्रोकेमिकल ग्रुप कंपनी लिमिटेड, हेबेई शिनहाई केमिकल ग्रुप कंपनी लिमिटेड और शेडोंग शेंगशिंग केमिकल कंपनी लिमिटेड शामिल हैं।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि 2025 से लगातार चीनी कंपनियों को निशाना बनाया जा रहा है, खासकर ईरान के तेल व्यापार से जुड़े मामलों में। उन्होंने कहा कि ये प्रतिबंध न केवल चीन की कंपनियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि तीसरे देशों के साथ सामान्य व्यापारिक संबंधों में भी बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।
प्रवक्ता ने अमेरिका के इन कदमों को अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यापारिक नियमों का उल्लंघन बताया। इस घटनाक्रम ने अमेरिका-चीन व्यापारिक संबंधों में एक नया तनाव पैदा कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।