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Crypto Exchanges vs Banks: आखिर क्यों डर गए बैंक, क्या है पूरा मामला?

May 2, 2026

Crypto Exchanges vs Banks: आखिर क्यों डर गए बैंक, क्या है पूरा मामला?
अमेरिका में क्रिप्टो इंडस्ट्री और पारंपरिक बैंकों के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंज Coinbase Global Inc. ने हाल ही में संकेत दिया है कि स्टेबलकॉइन यील्ड से जुड़े एक अहम मुद्दे पर सहमति बन गई है। इस समझौते से अमेरिकी सीनेट में अटके क्रिप्टो कानून को आगे बढ़ाने की संभावना मजबूत हो गई है। दरअसल, विवाद की जड़ यह थी कि क्या क्रिप्टो एक्सचेंजों को ग्राहकों को स्टेबलकॉइन रखने के बदले इनाम (रिवॉर्ड/यील्ड) देने की अनुमति होनी चाहिए। बैंकों ने इसका कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि अगर ग्राहकों को ऐसे रिवॉर्ड मिलने लगेंगे, तो लोग बड़ी संख्या में अपना पैसा पारंपरिक बैंकों से निकालकर क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर ले जाएंगे, जिससे बैंकिंग सिस्टम पर असर पड़ सकता है। Coinbase के मुख्य नीति अधिकारी Faryar Shirzad के अनुसार, भले ही बैंकों ने इन रिवॉर्ड्स पर सख्त नियंत्रण की मांग में कुछ हद तक सफलता पाई हो, लेकिन क्रिप्टो इंडस्ट्री ने एक महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। अब अमेरिकी यूजर्स को क्रिप्टो नेटवर्क की वास्तविक उपयोगिता के आधार पर कमाई करने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की। इस सहमति के बाद, क्रिप्टो बाजार के ढांचे से जुड़ा प्रस्ताव अब सीनेट बैंकिंग समिति में वोटिंग के लिए आगे बढ़ सकता है। इस बिल का उद्देश्य डिजिटल एसेट्स के रेगुलेशन को स्पष्ट करना है, खासकर Securities and Exchange Commission (SEC) और Commodity Futures Trading Commission (CFTC) के अधिकारों को लेकर। इस साल जनवरी में “Clarity Act” नामक बिल को पास कराने की कोशिश हुई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। उस समय Coinbase के CEO Brian Armstrong ने सार्वजनिक रूप से इस प्रस्ताव का समर्थन करने से इनकार कर दिया था, जिससे मामला और उलझ गया। तब से लेकर अब तक व्हाइट हाउस दोनों पक्षों—बैंक और क्रिप्टो कंपनियों—के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, अभी भी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि सभी मुद्दों का समाधान हो चुका है या नहीं। फिर भी, हालिया घटनाक्रम यह संकेत देता है कि दोनों पक्ष अब किसी साझा रास्ते की ओर बढ़ रहे हैं। कुल मिलाकर, यह टकराव सिर्फ रिवॉर्ड्स का नहीं, बल्कि भविष्य की वित्तीय व्यवस्था को लेकर है—जहां पारंपरिक बैंकिंग और नई क्रिप्टो अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की कोशिश जारी है।