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DRDO चीफ ने कहा– अग्नि-6 प्रोजेक्ट को चाहिए ग्रीन सिग्नल

April 30, 2026

DRDO चीफ ने कहा– अग्नि-6 प्रोजेक्ट को चाहिए ग्रीन सिग्नल
भारत की सामरिक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में Defence Research and Development Organisation (DRDO) अग्नि-6 मिसाइल के विकास पर तेजी से काम कर रहा है। यह अग्नि-5 का उन्नत और अधिक शक्तिशाली संस्करण होगा, जिसे लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी में रखा जा रहा है। DRDO प्रमुख Samir V. Kamat के बयान से साफ संकेत मिलता है कि तकनीकी स्तर पर संगठन तैयार है और अब सिर्फ केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार है। अग्नि-6 की सबसे बड़ी खासियत इसकी MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक है, जिसके जरिए एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकती है। इसकी रेंज लगभग 10,000 से 12,000 किलोमीटर बताई जा रही है, जबकि हल्के पेलोड के साथ यह 14,000–16,000 किलोमीटर तक भी जा सकती है। यह क्षमता भारत को वैश्विक स्तर पर रणनीतिक बढ़त दिला सकती है, खासकर China जैसे देशों के संदर्भ में। मिसाइल में मल्टी-स्टेज सॉलिड फ्यूल इंजन, अत्याधुनिक गाइडेंस सिस्टम (INS, रिंग लेजर जाइरोस्कोप और NavIC) और लगभग 3 टन तक वॉरहेड ले जाने की क्षमता होगी। यह रोड और रेल मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म से दागी जा सकेगी, और भविष्य में इसका सबमरीन-लॉन्च वेरिएंट भी विकसित किया जा सकता है, जिससे भारत की न्यूक्लियर ट्रायड और मजबूत होगी। रिपोर्ट के अनुसार, अग्नि-6 का डिजाइन तैयार हो चुका है और प्रोटोटाइप निर्माण पर काम चल रहा है। हालांकि, प्रोजेक्ट को पूरी तरह आगे बढ़ाने और फ्लाइट टेस्ट शुरू करने के लिए सरकारी मंजूरी आवश्यक है। सफल परीक्षण के बाद इसे भारतीय सेना की स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड में शामिल किया जाएगा। अग्नि-6 की जरूरत इसलिए भी महसूस की जा रही है क्योंकि भारत को दो मोर्चों—चीन और पाकिस्तान—पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह मिसाइल “सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी” को मजबूत करेगी और भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस को अधिक विश्वसनीय बनाएगी। कुल मिलाकर, अग्नि-6 भारत की रक्षा रणनीति में एक बड़ा और निर्णायक कदम साबित हो सकती है।