Tuesday, May 12, 2026
English edition
Veridhar Veridhar

Rooted in Truth

Politics

छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिला आरक्षण पर बहस की शुरुआत, विपक्ष ने जताई कड़ी आपत्ति

April 30, 2026

छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिला आरक्षण पर बहस की शुरुआत, विपक्ष ने जताई कड़ी आपत्ति
रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण मुद्दे पर जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सदन में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए शासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के लिए सदन की ओर से चार घंटे का समय तय किया गया। हालांकि, प्रस्ताव पेश होते ही विपक्ष ने इसे लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने इसके जवाब में एक अशासकीय संकल्प प्रस्ताव प्रस्तुत करने की कोशिश की, जिसे सदन की आसंदी ने स्वीकार नहीं किया। इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए डॉ. महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले निंदा प्रस्ताव लाने की बात कर रहे थे, लेकिन जो प्रस्ताव पेश किया गया, उसमें निंदा का कोई उल्लेख नहीं है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष का आरोप था कि सत्ता पक्ष महिलाओं को लेकर सदन के भीतर और बाहर भ्रम फैला रहा है। उनका कहना था कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से विधायक लता उसेंडी ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा विपक्ष ही रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में इस बिल को पारित होने से रोकने में भी विपक्ष की भूमिका रही और महिलाओं के सम्मान और भावनाओं की अनदेखी की गई। कांग्रेस की ओर से विधायक अनिला भेड़िया ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि यह बिल 2023 में पारित हो चुका है, इसलिए इसे 2029 तक टालने के बजाय तुरंत लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास गवाह है कि महिलाओं के सम्मान की अनदेखी करने वालों का अंत बुरा हुआ है, और रामायण का उदाहरण देते हुए नारी सम्मान के महत्व को रेखांकित किया। कुल मिलाकर, महिला आरक्षण का मुद्दा सदन में गंभीर बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बना रहा।