Sunday, September 27, 2026
English edition
Veridhar Veridhar

Rooted in Truth

India

किसानों की बदल रही तकदीर, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मछली पालन बना समृद्धि का नया मॉडल

September 15, 2026 Source: Veridhar

किसानों की बदल रही तकदीर, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मछली पालन बना समृद्धि का नया मॉडल
रायुपर, 15 सितंबर 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के गांव, गरीब और किसान को सशक्त बनाने के विजन के अनुरूप, केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर जिले के करीब 150 किसान अब मछली पालन, हैचरी और पाउंड लाइनर जैसी आधुनिक गतिविधियों के जरिए अपनी आय और आजीविका के नए रास्ते तैयार कर रहे हैं। सरकारी अनुदान और बुनियादी सुविधाओं के विकास से ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। *बिरकोनी के दिनेश चन्द्राकर बने मिसाल* प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) ने आधुनिक तकनीकों, वित्तीय सहायता और अनुदान के जरिए देश के हजारों किसानों और मछली पालकों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है । पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत से परेशान होकर बिरकोनी निवासी दिनेश चन्द्राकर ने मछली पालन की तरफ कदम बढ़ाया। योजना के तहत उन्होंने करीब 7.50 लाख रुपए की लागत से एक हेक्टेयर में तालाब खुदवाया और 14 लाख रुपए की लागत से 20 हजार वर्गफुट में मछली हैचरी स्थापित की। *उत्पादन और कमाई* हैचरी में तैयार बच्चे तालाब में डाले जाते हैं, जिससे 8 से 9 महीने में लगभग 15 टन मछली तैयार हो जाती है। 70 से 80 रुपए प्रति किलो की लागत आने के बावजूद बाजार में 120 से 150 रुपए प्रति किलो तक बिक्री होने से उन्हें बेहतरीन मुनाफा मिल रहा है। *ग्राम बकमा के हिमांशु चंद्राकर को मिला स्थायी जरिया* प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तालाब निर्माण, बायोफ्लॉक यूनिट, मछली बीज हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और फीड प्लांट जैसी परियोजनाओं के लिए सहायता दी जाती है। ग्राम बकमा के किसान हिमांशु चंद्राकर ने लगभग 28 लाख रुपए की लागत से दो पाउंड लाइनर यूनिट तैयार कराईं। सरकार से 60 प्रतिशत अनुदान मिलने के बाद, सभी खर्च काटकर उन्हें सालाना 3 से 4 लाख रुपए की शुद्ध बचत हो रही है। *ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मजदूरों को मिल रहा संबल* मछली पालन से केवल यूनिट संचालकों ही नहीं, बल्कि स्थानीय मजदूरों को भी बड़ा लाभ मिला है। बिरकोनी के मजदूरों का कहना है कि अब उन्हें काम की तलाश में बाहर नहीं जाना पड़ता, बल्कि गांव में ही सालभर नियमित रोजगार मिल रहा है। करीब 9 हजार रुपए प्रतिमाह की आय से उनके परिवारों का जीवनयापन बेहद आसान हो गया है। *योजना के मुख्य बिंदु और प्रावधान* बुनियादी ढांचे के विकास के लिए नए तालाबों का निर्माण, बायोफ्लॉक यूनिट, हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और मछली दाना निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 60 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 40 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है। धान की पारंपरिक खेती पर निर्भर महासमुंद के किसानों के लिए अब मछली पालन आत्मनिर्भरता, समृद्धि और विकास का एक नया प्रतीक बन चुका है।