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जनकल्याण से डिजिटल गवर्नेंस तक, नई तकनीक से बदल रहा छत्तीसगढ़
August 18, 2026 Source: Veridhar
रायपुर, 18 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। राज्य में वर्तमान में 83.36 लाख राशन कार्ड संचालित हैं, जिनमें 2.73 करोड़ सदस्य पंजीकृत हैं। अनुमानित वर्ष 2026 की आबादी के आधार पर प्रदेश की करीब 87 प्रतिशत आबादी को खाद्य सुरक्षा का लाभ मिल रहा है। पिछले तीन वर्षों में लगभग 10.44 लाख नए राशन कार्ड जारी किए गए हैं और 16.93 लाख नए सदस्यों को राशन कार्ड से जोड़ा गया है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली को बनाया जा रहा अधिक सुलभ
प्रदेश में खाद्यान्न वितरण को आसान बनाने के लिए उचित मूल्य दुकानों का विस्तार किया गया है। वर्तमान में 14,182 शासकीय उचित मूल्य दुकानें संचालित हैं। पिछले तीन वर्षों में 445 नई उचित मूल्य दुकानों का आवंटन किया गया है, जिससे हितग्राहियों को उनके नजदीक खाद्यान्न उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। राशन कार्डों के नवीनीकरण से विभागीय डेटाबेस को भी अधिक व्यवस्थित और त्रुटिरहित बनाने में सहायता मिली है।
राज्य में चावल, चना, शक्कर और गुड़ जैसी आवश्यक खाद्य सामग्री का रियायती दर पर वितरण किया जा रहा है। अनुसूचित और माड़ा क्षेत्रों के अंत्योदय एवं प्राथमिकता परिवारों के लिए चना वितरण की व्यवस्था भी जारी है। लगभग 31.64 लाख अंत्योदय एवं प्राथमिकता राशन कार्डधारी परिवारों को रियायती दर पर चना उपलब्ध कराया जा रहा है।
धान खरीदी में बना रिकॉर्ड
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में 2,739 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 25.49 लाख किसानों से रिकॉर्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। वहीं खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 2,740 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई।
पात्र किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान खरीदी की जा रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ किसान उन्नति योजना की राशि मिलाकर कुल 3,100 रुपये प्रति क्विंटल तक भुगतान किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 25.49 लाख किसानों को कुल 46,289 करोड़ रुपये और वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों को 43,723 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। किसानों को खरीदी के 48 घंटे के भीतर समर्थन मूल्य की राशि ऑनलाइन उनके खातों में अंतरित करने की व्यवस्था की गई।
धान खरीदी में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल
धान खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रदेश के उपार्जन केंद्रों पर बायोमेट्रिक डिवाइस, आधार सत्यापन, इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन और नमी मापक यंत्र जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के माध्यम से धान उपार्जन और निराकरण की प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं की निगरानी की जा रही है।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 9.73 लाख क्विंटल अवैध धान का परिवहन जब्त किया गया, जिससे शासन को लगभग 301.89 करोड़ रुपये की बचत हुई। डिजिटल निगरानी के जरिए फर्जी पंजीयन, दूसरे राज्यों से धान की आवक, बिचौलियों की भूमिका, अवैध रीसाइक्लिंग और गैर-कृषकों की प्रविष्टियों पर नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया गया है। इन सुधारात्मक उपायों से राज्य शासन को लगभग 4,000 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष बचत हुई।
2026-27 की धान खरीदी के लिए पंजीयन शुरू
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी हेतु किसान पंजीयन शुरू हो चुका है। पंजीयन की अवधि 1 जुलाई 2026 से 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। पिछले वर्ष एग्रीस्टैक आईडी वाले पंजीकृत किसानों को इस वर्ष धान विक्रय के लिए मान्य किया गया है, जिससे उन्हें दोबारा पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी, हालांकि भूमि संबंधी बदलाव की स्थिति में आवश्यक मैपिंग करानी होगी।
आगामी खरीफ विपणन वर्ष में संग्रहण केंद्रों पर डिजिटल तौल और ई-वे ब्रिज जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार की योजना है। धान उठाव, कस्टम मिलिंग और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में परिवहन लागत को नियंत्रित करने के लिए रूट ऑप्टिमाइजेशन टूल का उपयोग भी प्रस्तावित है।
खाद्यान्न भंडारण क्षमता का विस्तार
खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पिछले तीन वर्षों में 27 जिलों के 55 स्थानों पर 2.94 लाख मीट्रिक टन क्षमता के नए गोदामों का निर्माण पूरा किया गया है। वहीं आठ जिलों के 13 स्थानों पर 89,088 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम निर्माणाधीन हैं।
आने वाले दो वर्षों में राज्य भंडार गृह निगम के माध्यम से 2.71 लाख टन क्षमता के नए गोदाम बनाने की योजना है। इसके अलावा PEG योजना के तहत 3.5 लाख टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित करने की कार्ययोजना प्रस्तावित है।
स्मार्ट पीडीएस और ग्रेन एटीएम पर जोर
आगामी दो वर्षों की कार्ययोजना में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। स्मार्ट पीडीएस/सार्थक पीडीएस योजना के तहत राशन कार्ड प्रबंधन, सप्लाई चेन मैनेजमेंट और खाद्यान्न वितरण सहित पीडीएस के विभिन्न चरणों को केंद्रीकृत ऑनलाइन प्रणाली से जोड़ने की योजना है।
दूरस्थ और नेटवर्कविहीन क्षेत्रों में संचालित 704 उचित मूल्य दुकानों को ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ने के लिए दूरसंचार विभाग के साथ समन्वय किया जाएगा। इसके अलावा रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर की तर्ज पर अन्य जिलों में भी ग्रेन एटीएम स्थापित करने की योजना है, जिससे राशन कार्डधारी अपनी सुविधा के अनुसार चावल प्राप्त कर सकेंगे।
12 जिलों में PNG नेटवर्क विस्तार की योजना
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति क्षेत्र की आगामी योजनाओं में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन का विस्तार भी शामिल है। राज्य के विभिन्न जिलों में LPG गैस के स्थान पर PNG गैस की उपलब्धता और आपूर्ति के लिए पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार की योजना बनाई गई है। आगामी दो वर्षों में 12 जिलों में PNG गैस उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।