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तहलका के संस्थापक संपादक तरुण तेजपाल को हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी

August 6, 2026 Source: Veridhar

तहलका के संस्थापक संपादक तरुण तेजपाल को हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी
Bombay High Court On Tarun Tejpal: इस वक्त की बड़ी खबर महाराष्ट्र से आई है। रेप केस में तहलका (Tehelka) के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल रेप केस में दोषी करार दिया है। इसी के साथ ही हाईकोर्ट के ट्रायल के फैसले को पलट दिया है। फैसला सुनाए जाने के दौरान तरुण तेजपाल अदालत में मौजूद थे। सजा का ऐलान दोपहर 2.30 बजे किया जाएगा। मई 2021 में सेशंस कोर्ट से बरी होने के बाद राज्य सरकार ने फैसले के खिलाफ अपील की थी। जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामदार की बेंच ने तीन दिन की अंतिम सुनवाई के बाद 30 जुलाई को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। आज स्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामदार की बेंच ने मापुसा की सेशंस कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए तरुण तेजपाल रेप केस में दोषी करार दिया। बेंच ने तेजपाल को IPC की धारा 376(2)(f) और 376(2)(k) के तहत रेप और सेक्शुअल हैरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) का दोषी माना। साथ ही धारा 354 A और 354 B के तहत भी दोषी ठहराया। नरमी बरतने की अपील कोर्ट ने खारिज की आदेश सुनाए जाते समय तेजपाल कोर्ट में मौजूद था। जजों से बात करते हुए तेजपाल ने कहा कि अब वह बुजुर्ग हो गए हैं और मामले में नरमी बरतने की गुहार लगाई। तेजपाल ने कहा, ‘मैं 62 साल का हूं और मेरा मानना है कि मैं पीड़ित हूं। मेरी पत्नी है, और इसके अलावा कहने के लिए बहुत कुछ नहीं है। मैं बस इतना कह सकता हूं कि हम अपील करते हैं कि कृपया मेरे प्रति नरमी बरतें। पूरा मामला जानें… 7-8 नवंबर 2013 में तहलका की साथी महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर गोवा में थिंकफेस्ट इवेंट के दौरान एक होटल की लिफ्ट में सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाया था।ईमेल लीक होने के बाद मामला सार्वजनिक हुआ, जिसके बाद तेजपाल ने इस्तीफा दे दिया और उन्हें 30 नवंबर, 2013 को गिरफ्तार किया गया था। जुलाई 2014 में उन्हें जमानत मिली और 2017 में ट्रायल शुरू हुआ। मई 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था। जानें तेजपाल की जीवनी तेजपाल देश के प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक और उपन्यासकार रहे हैं। उनके पास पत्रकारिता का 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। साल 1980 में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप से पत्रकारिता की शुरुआत की थी।1984 में वे बतौर सीनियर सब-एडिटर ‘इंडिया टुडे’ मैगजीन के लिए काम करने लगे। 1994 में फाइनेंशियल एक्सप्रेस को जॉइन किया। इसके बाद वे ‘आउटलुक पत्रिका’ के साथ जुड़े। उन्होंने खुद की पब्लिशिंग कंपनी इंडिया इंक’ शुरू की। ये वही कंपनी है, जिसने 1998 में अरुंधति रॉय का उपन्यास द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ छापा था। जिसे बुकर प्राइज मिला था। मार्च 2000 में उन्होंने एक अन्य पत्रकार अनिरुद्ध बहल के साथ मिलकर ऑनलाइन इंवेस्टिगेटिव वेबसाइट ‘तहलका डॉट कॉम’ शुरू की। साल 2004 में ये एक टैब्लॉइड न्यूजपेपर में तब्दील हो गई थी।