Thursday, August 13, 2026
English edition
Veridhar Veridhar

Rooted in Truth

World

147 डॉलर प्रति बैरल का रिकॉर्ड आज भी क्यों है ऐतिहासिक?

July 23, 2026 Source: Veridhar

147 डॉलर प्रति बैरल का रिकॉर्ड आज भी क्यों है ऐतिहासिक?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया तेजी ने एक बार फिर वर्ष 2008 की यादें ताजा कर दी हैं। उस समय ब्रेंट क्रूड का भाव रिकॉर्ड 147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। खास बात यह थी कि उस दौर में न तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद था और न ही ईरान और अमेरिका के बीच कोई युद्ध चल रहा था। इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमतों ने इतिहास का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया था। विशेषज्ञों के अनुसार, उस समय दुनिया की अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ रही थी। चीन और भारत जैसे देशों में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही थीं, जिससे ऊर्जा की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। दूसरी ओर, उत्पादन उसी गति से नहीं बढ़ सका। मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर ने तेल की कीमतों पर दबाव बना दिया। इसके अलावा कमोडिटी बाजार में बड़े पैमाने पर निवेश और सट्टेबाजी ने भी कीमतों को तेजी से ऊपर पहुंचाया। उस समय कई वैश्विक निवेशकों ने शेयर बाजार से पैसा निकालकर कच्चे तेल जैसी कमोडिटी में निवेश करना शुरू कर दिया था। वहीं अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने भी तेल को निवेश का आकर्षक विकल्प बना दिया, जिससे कीमतों में और तेजी आई। भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर इसका सीधा असर पड़ा। कच्चा तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ गया, ईंधन की कीमतों पर दबाव आया और महंगाई में बढ़ोतरी देखने को मिली। परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की कई वस्तुएं भी महंगी हो गईं, जिससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा। हालांकि यह तेजी लंबे समय तक नहीं टिक सकी। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और आर्थिक मंदी के बाद ऊर्जा की मांग अचानक घट गई। उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों में कमी आने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई और कुछ ही महीनों में यह 147 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर करीब 40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह घटना आज भी वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है।