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E-20 विवाद के बीच E-30 ब्लेंडिंग पर सरकार की सख्ती, विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही निर्णय

July 7, 2026 Source: Veridhar

E-20 विवाद के बीच E-30 ब्लेंडिंग पर सरकार की सख्ती, विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही निर्णय
देशभर में E-20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों और उपभोक्ताओं की चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने फिलहाल पेट्रोल में E-22 से E-30 तक अधिक एथेनॉल मिश्रण (ब्लेंडिंग) लागू करने की प्रक्रिया को धीमा कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस दिशा में कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा। पहले तकनीकी अध्ययन, विशेषज्ञों की राय और व्यापक जन-परामर्श के आधार पर ही आगे की रणनीति तय की जाएगी। हालांकि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) E-22, E-25, E-27 और E-30 ईंधनों के लिए मानक तैयार कर चुका है, लेकिन अंतिम मंजूरी अभी बाकी है। E-20 पेट्रोल लागू होने के बाद कई वाहन मालिकों ने माइलेज में कमी, इंजन की कार्यक्षमता और पुराने वाहनों पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई है। ऑटोमोबाइल कंपनियों ने इन आशंकाओं को लेकर अपनी सफाई दी है, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसी कारण सरकार अब उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों पर बेहद सतर्क रुख अपना रही है। सरकार ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) को E-22 से E-30 तक के ईंधनों का मौजूदा वाहनों पर प्रभाव जांचने की जिम्मेदारी सौंपी है। अध्ययन में माइलेज, इंजन प्रदर्शन, रखरखाव लागत, फ्यूल सिस्टम पर असर और वाहन की कुल कार्यक्षमता का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इस रिपोर्ट के अगले वर्ष के अंत तक आने की उम्मीद है। इसके अलावा सरकार ईंधन की कीमत, टैक्स में संभावित राहत, वाहनों की तकनीकी अनुकूलता, उपभोक्ताओं की लागत और कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे पहलुओं पर भी विचार करेगी। माना जा रहा है कि यदि उच्च एथेनॉल मिश्रण सफल रहता है तो इससे चीनी मिलों की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग होगा और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। सरकार का स्पष्ट संकेत है कि तकनीकी रिपोर्ट और विशेषज्ञों की सिफारिशों के बाद ही E-22 से E-30 एथेनॉल ब्लेंडिंग पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।