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इजरायल में सरकार और सुप्रीम कोर्ट की टक्कर चरम पर, आदेश मानने से किया इनकार, विपक्ष ने उठाए सवाल
July 6, 2026 Source: Veridhar
इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव अब गंभीर संवैधानिक संकट का रूप लेता नजर आ रहा है। रविवार को सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को मानने से इनकार कर दिया, जिसमें देश के कमर्शियल मीडिया रेगुलेटर **सेकेंड अथॉरिटी फॉर टेलीविजन एंड रेडियो (SATR)** को अपना काम जारी रखने की अनुमति दी गई थी। इजरायल के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी सरकार ने आधिकारिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठुकराया है।
पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रेगुलेटर की नई परिषद के गठन पर रोक लगा दी और मौजूदा परिषद को अपने अधिकारों का इस्तेमाल जारी रखने का निर्देश दिया। अदालत का मानना था कि परिषद के कुछ सदस्यों के इस्तीफे राजनीतिक दबाव में कराए गए हो सकते हैं, इसलिए नई नियुक्तियों की प्रक्रिया पर रोक लगाना जरूरी है।
हालांकि, संचार मंत्री श्लोमो कारही और न्याय मंत्री यारिव लेविन ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि अदालत कानून से ऊपर नहीं है। उनका तर्क है कि मौजूदा परिषद के पास कानूनी रूप से आवश्यक सदस्य संख्या नहीं है, इसलिए उसके किसी भी फैसले को सरकार मान्यता नहीं दे सकती।
सरकार के इस कदम पर विपक्ष और संवैधानिक विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। डिप्टी अटॉर्नी जनरल गिल लिमोन ने चेतावनी दी कि अगर सरकार अपनी सुविधा के अनुसार अदालत के आदेशों का पालन करेगी, तो इससे कानून के शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर होगी। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत बताया, जबकि विपक्षी नेता यायर गोलान ने आरोप लगाया कि सरकार न्यायपालिका को कमजोर कर भविष्य की चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
पत्रकार संगठनों और लोकतंत्र समर्थक समूहों ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ मीडिया रेगुलेटर तक सीमित नहीं है, बल्कि इजरायल में प्रेस की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।