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नैनो उर्वरकों का कमाल, खेती बनी लाभकारी और टिकाऊ

June 2, 2026 Source: Veridhar

नैनो उर्वरकों का कमाल, खेती बनी लाभकारी और टिकाऊ
*प्रगतिशील किसान खानेंद्र कुमेटी की प्रेरणादायक कहानी* *फसल उत्पादन में नैनो डीएपी एवं यूरिया के उपयोग से जमीन की बनी रहेगी उर्वरकता* रायपुर 02 जून 2026// नारायणपुर के ग्राम केरलापाल के निवासी खानेंद्र कुमेटी एक मेहनती और प्रगतिशील किसान हैं। उनका जीवन संघर्ष, परिश्रम और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है। कुछ वर्ष पहले तक वे पारंपरिक खेती करते थे, जिससे उन्हें बहुत कम लाभ मिलता था। खेती की लागत बढ़ रही थी और उत्पादन अपेक्षाकृत कम हो रहा था। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं हो पा रही थी। खानेंद्र कुमेटी ने हार मानने के बजाय नई तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया और आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने उन्नत बीजों का उपयोग शुरू किया, खेतों में जैविक खाद का प्रयोग बढ़ाया तथा सिंचाई के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाया। इससे उनकी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उन्होंने धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों और फलदार पौधों की खेती भी शुरू की। फसल विविधीकरण के कारण उनकी आय के स्रोत बढ़ गए। उन्होंने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई, जिससे पानी की बचत हुई और पौधों को आवश्यक मात्रा में पानी मिलता रहा। इसके अतिरिक्त वे समय-समय पर मिट्टी परीक्षण भी करवाते हैं, जिससे फसल के अनुसार उचित उर्वरकों का चयन कर पाते हैं। खानेंद्र कुमेटी की सफलता देखकर गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हुए। वे अपने अनुभव और ज्ञान को अन्य किसानों के साथ साझा करते हैं तथा उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनकी पहल से गांव में कृषि के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई है और कई किसानों की आय में वृद्धि हुई है। आज खानेंद्र कुमेटी न केवल एक सफल किसान हैं, बल्कि गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी हैं। उनका मानना है कि खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किया जाए तो यह अत्यंत लाभकारी व्यवसाय बन सकता है। उनके परिश्रम, दूरदर्शिता और नवाचार ने उन्हें ग्राम केरलापाल के एक सम्मानित प्रगतिशील किसान के रूप में पहचान दिलाई है। खानेंद्र कुमेटी की कहानी हमें यह संदेश देती है कि मेहनत, सीखने की इच्छा और नई तकनीकों को अपनाने का साहस किसी भी किसान को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। उन्होंने बताया कि फसल उत्पादन के लिए सबसे अच्छी नैनो डीएपी और नैनो यूरिया की उपयोग से जमीन की उर्वरकता नष्ट नहीं होती और फसल को उत्पादन में सहायक होती है, कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मछली पालन और उद्यानिकी फसलों का भी उत्पादन करते हैं।