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ममता की पार्टी में बगावत, लेकिन BJP ने बागियों के लिए दरवाजे किए बंद ...

June 2, 2026 Source: Veridhar

ममता की पार्टी में बगावत, लेकिन BJP ने बागियों के लिए दरवाजे किए बंद ...
यह खबर पश्चिम बंगाल की राजनीति में बढ़ते संकट और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह पर केंद्रित है। विधानसभा चुनाव में पार्टी को झटका लगने और सिग्नेचर फर्जीवाड़ा विवाद के बाद टीएमसी के कई नेताओं और विधायकों में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी बीच कुछ विधायकों के पार्टी छोड़ने की अटकलों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। टीएमसी के भीतर बढ़ते मतभेदों के बीच यह चर्चा तेज है कि कई असंतुष्ट विधायक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का रुख कर सकते हैं। हालांकि, पश्चिम बंगाल बीजेपी ने इस संभावना को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट कहा कि पार्टी टीएमसी से आने वाले बागी विधायकों को शामिल नहीं करेगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि “बीजेपी का तृणमूलीकरण कभी नहीं होगा” और पार्टी भ्रष्टाचार या विवादों से जुड़े नेताओं के लिए अपने दरवाजे नहीं खोलेगी। समिक भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेपी ने राज्य में अपनी राजनीतिक ताकत संगठन और कार्यकर्ताओं के बल पर बनाई है, न कि दूसरे दलों के नेताओं को शामिल करके। उनका कहना है कि जनता ने टीएमसी के खिलाफ मतदान किया है, इसलिए उन्हीं नेताओं को बीजेपी में शामिल करना पार्टी की मूल विचारधारा के विपरीत होगा। वहीं, टीएमसी में संकट उस समय और गहरा गया जब सिग्नेचर फर्जीवाड़ा विवाद में पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाने वाले दो विधायकों—ऋतब्रत बंदोपाध्याय और संदीपान साहा—को पार्टी से बाहर कर दिया गया। इसके बाद पार्टी में बड़े पैमाने पर टूट की अटकलें शुरू हो गईं। सूत्रों का दावा है कि करीब 50 विधायक इन दोनों नेताओं के संपर्क में हैं और वे खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” बताने की तैयारी कर रहे हैं। टीएमसी के निष्कासित नेता रिजू दत्ता ने भी बड़ा दावा करते हुए कहा कि लगभग 50 विधायकों ने बैठक की है और वे पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने की रणनीति बना रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पास दो-तिहाई बहुमत का समर्थन है और इसी आधार पर वे खुद को असली टीएमसी मानते हैं। इन घटनाक्रमों के चलते पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के दो धड़ों में बंटने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, जबकि बीजेपी ने साफ संकेत दिया है कि वह इस राजनीतिक उथल-पुथल का लाभ उठाने के लिए टीएमसी के बागी नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल नहीं करेगी।