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80 लाख महिलाओं के नाम हटने से बढ़ी मुश्किलें, सरकार पर विपक्ष का बड़ा हमला ...

June 2, 2026 Source: Veridhar

80 लाख महिलाओं के नाम हटने से बढ़ी मुश्किलें, सरकार पर विपक्ष का बड़ा हमला ...
महाराष्ट्र की महायुति सरकार की महत्वाकांक्षी **मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना** को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सरकार ने योजना के लाभार्थियों की सूची से करीब **80 लाख महिलाओं के नाम हटा दिए हैं**, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों ने इस फैसले को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और दावा किया है कि राज्य सरकार वित्तीय संकट से जूझ रही है, इसलिए लाभार्थियों की संख्या कम की जा रही है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना की शुरुआत महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से कुछ महीने पहले की गई थी। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने **1,500 रुपये की आर्थिक सहायता** प्रदान की जाती है। सरकार के अनुसार, जिन महिलाओं ने निर्धारित समय सीमा तक अपना **ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापन पूरा नहीं किया**, उनके नाम लाभार्थी सूची से हटा दिए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस कार्रवाई के बाद योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं की संख्या लगभग **2.4 करोड़ से घटकर 1.7 करोड़** रह गई है। अधिकारियों का कहना है कि कई महिलाएं योजना की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं कर रही थीं। इनमें ऐसे परिवार भी शामिल हैं जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक पाई गई, कुछ लाभार्थियों की आयु निर्धारित सीमा से ज्यादा थी, जबकि लगभग पांच लाख महिलाएं अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी ले रही थीं। सरकार का दावा है कि लाभार्थियों को ई-केवाईसी पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। अधिकारियों के अनुसार, महिलाओं को सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के लिए करीब आठ महीने का अवसर प्रदान किया गया था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने प्रक्रिया पूरी नहीं की। दूसरी ओर, विपक्ष ने इस फैसले को लेकर सरकार को निशाने पर लिया है। कांग्रेस नेता **विजय वडेट्टीवार** ने आरोप लगाया कि यह योजना केवल चुनावी लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी और अब महिलाओं के साथ विश्वासघात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावित महिलाएं आगामी चुनावों में इसका जवाब देंगी। वहीं, **राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट)** की सांसद **सुप्रिया सुले** ने भी सरकार की आलोचना की। उनका कहना है कि सरकार ने ई-केवाईसी की अंतिम तिथि निर्धारित करने के बाद समय सीमा में कोई अतिरिक्त विस्तार नहीं दिया, जिससे लाखों महिलाएं योजना से बाहर हो गईं। इस पूरे मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की सियासत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।