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TMC के दो विधायकों की छुट्टी, पार्टी ने लिया कड़ा फैसला ...

June 1, 2026 Source: Veridhar

TMC के दो विधायकों की छुट्टी, पार्टी ने लिया कड़ा फैसला ...
पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने दो विधायकों संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने दोनों नेताओं पर दल-विरोधी गतिविधियों और संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। इस कार्रवाई के बाद दोनों विधायक विधानसभा के सदस्य बने रहेंगे, लेकिन अब उन्हें तृणमूल कांग्रेस के विधायक के रूप में नहीं माना जाएगा। TMC द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि पार्टी के सक्षम प्राधिकारी ने गंभीर अनुशासनहीनता और पार्टी हितों के खिलाफ कार्य करने के आरोपों को देखते हुए दोनों नेताओं को प्राथमिक सदस्यता से हटाने का निर्णय लिया है। पार्टी का कहना है कि दोनों विधायक लंबे समय से महत्वपूर्ण बैठकों में अनुपस्थित रह रहे थे और सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान दे रहे थे जो पार्टी की आधिकारिक लाइन के विपरीत थे। यह कार्रवाई उस विवाद के बाद सामने आई है जिसे राजनीतिक गलियारों में “फर्जी सिग्नेचर मामला” कहा जा रहा है। दरअसल, विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद के लिए शोभनदेब चटर्जी के समर्थन में एक प्रस्ताव पेश किया गया था। इस प्रस्ताव पर TMC के लगभग 70 विधायकों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया था। हालांकि बाद में कुछ विधायकों ने शिकायत दर्ज कराई कि प्रस्ताव पर मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं और उनकी जानकारी के बिना उनका नाम इस्तेमाल किया गया है। इस मामले ने पार्टी के भीतर हलचल पैदा कर दी और हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए। संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने भी इस विवाद को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके कुछ समय बाद ही पार्टी नेतृत्व ने दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें निष्कासित करने का फैसला ले लिया। TMC ने इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बोस को भी पत्र भेज दिया है। हालांकि भारतीय कानून के अनुसार दोनों विधायक फिलहाल अपने विधानसभा सदस्य पद पर बने रहेंगे, लेकिन उनकी राजनीतिक पहचान अब TMC से अलग मानी जाएगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों नेता तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन बाद के दिनों में उन्होंने पार्टी अनुशासन और संगठनात्मक नियमों का पालन नहीं किया। TMC नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी में अनुशासनहीनता और दल-विरोधी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस फैसले को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने और असंतुष्ट नेताओं के प्रति नेतृत्व के सख्त रुख का संदेश गया है।