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दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा कदम: आधार QR तकनीक से तेज होगी कैदियों की रिहाई

May 27, 2026 Source: Veridhar

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा कदम: आधार QR तकनीक से तेज होगी कैदियों की रिहाई
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने जेलों में बंद अंडरट्रायल कैदियों की रिहाई में हो रही देरी को लेकर बड़ा और अहम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने दिल्ली की सभी जेलों के अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि जमानतदारों की पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए आधार आधारित QR कोड वेरिफिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाए। इस कदम का उद्देश्य उन कैदियों को जल्द रिहाई दिलाना है जिन्हें अदालत से जमानत मिल चुकी होती है, लेकिन सत्यापन प्रक्रिया लंबी होने के कारण उन्हें कई दिनों तक जेल में रहना पड़ता है। दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस अमित महाजन शामिल थे, ने 22 मई 2026 को यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि जमानत मिलने के बाद भी कई कैदियों की रिहाई में 50 दिनों तक की देरी देखी गई है, जो न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कोर्ट ने माना कि जमानतदारों की पहचान और दस्तावेजों की जांच में काफी समय लग जाता है, जिसके कारण कैदियों को अनावश्यक रूप से जेल में रहना पड़ता है। हाईकोर्ट ने सभी जेल सुपरिटेंडेंट को निर्देश दिया कि वे आधार QR कोड आधारित एप्लीकेशन का उपयोग कर जमानतदारों के दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन करें। अदालत का मानना है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से सत्यापन प्रक्रिया तेज होगी और कैदियों की रिहाई में होने वाली देरी कम की जा सकेगी। कोर्ट ने यह भी बताया कि 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 के बीच जमानत आदेश जारी होने के बाद कैदियों और दोषियों की रिहाई में औसतन 5 से 6 दिनों का समय लग रहा था। हालांकि कई मामलों में यह अवधि इससे कहीं अधिक बढ़ गई थी। दरअसल, यह मामला तब सामने आया जब एक कैदी को जमानत मिलने के बावजूद लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। अदालत ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की और पाया कि जेल प्रशासन द्वारा सत्यापन प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं की जा रही थी। इसके बाद कोर्ट ने तकनीक आधारित समाधान अपनाने का निर्देश दिया। दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भविष्य में जमानत पाने वाले कैदियों को राहत मिलने की उम्मीद है।