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दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हलचल, CAT ने DGHS ट्रांसफर पर लगाई रोक

May 27, 2026 Source: Veridhar

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हलचल, CAT ने DGHS ट्रांसफर पर लगाई रोक
दिल्ली स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ने दिल्ली सरकार को बड़ा झटका दिया है। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल के तबादले और उन्हें “स्थानांतरण की प्रतीक्षा” श्रेणी में डालने वाले आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 को होगी। दरअसल, 21 मई 2026 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, दिल्ली सरकार ने एक कार्यालय आदेश जारी कर डॉ. वत्सला अग्रवाल को उनके पद से हटाते हुए अगले आदेश तक “वेटिंग फॉर पोस्टिंग” श्रेणी में डाल दिया था। खास बात यह रही कि उन्हें कोई नया पद या जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी। लगभग नौ महीने पहले ही उन्हें इस पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन अचानक जारी हुए इस आदेश ने प्रशासनिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए। डॉ. वत्सला अग्रवाल ने इस आदेश को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में चुनौती दी। उन्होंने अपने आवेदन में कहा कि यह फैसला पूरी तरह “मनमाना” और “दंडात्मक” है। उनका कहना था कि हाल ही में स्वास्थ्य विभाग में हुए विजिलेंस निरीक्षण के बाद यह कार्रवाई की गई, जबकि उन्होंने जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग किया था। मांगे गए सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराए गए थे। सुनवाई के दौरान डॉ. अग्रवाल के वकील ने तर्क दिया कि 30 वर्षों से अधिक की सेवा में उनके खिलाफ कभी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में बिना स्पष्ट कारण बताए उन्हें पद से हटाना उनकी पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचाने जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना किसी वैकल्पिक पद के “प्रतीक्षा सूची” में डालना सेवा नियमों और दिल्ली स्वास्थ्य सेवा की तबादला नीति के खिलाफ है। ट्रिब्यूनल ने शुरुआती सुनवाई में माना कि यदि आदेश पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो डॉ. अग्रवाल को अपूरणीय क्षति हो सकती है। इसी आधार पर CAT ने 29 मई तक आदेश के अमल पर रोक लगा दी और दिल्ली सरकार से जवाब भी मांगा है। मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। डॉ. अग्रवाल 31 मई को होने वाले दिल्ली मेडिकल काउंसिल चुनावों की निगरानी कर रही थीं। उनके वकील ने दलील दी कि चुनाव से ठीक पहले उन्हें हटाना प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है और यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया प्रतीत होता है। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट की उन टिप्पणियों का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा गया है कि तबादले का इस्तेमाल किसी अधिकारी को दंडित करने के लिए नहीं किया जा सकता। अब इस मामले पर सबकी नजरें 29 मई की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां दिल्ली सरकार को अपने फैसले का पक्ष रखना होगा।