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टीएमसी पर संकट के बादल, विधायक और सांसदों के पाला बदलने की चर्चा तेज

May 27, 2026 Source: Veridhar

टीएमसी पर संकट के बादल, विधायक और सांसदों के पाला बदलने की चर्चा तेज
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। राज्य में बीजेपी सरकार बनने के बाद राजनीतिक माहौल लगातार गरमाया हुआ है। अवैध निर्माणों के खिलाफ सरकार का बुलडोजर एक्शन जारी है, जिसकी चपेट में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई दफ्तर भी आए हैं। इसी बीच टीएमसी के अंदर बढ़ती नाराजगी और टूट की खबरों ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। बीजेपी सांसद सौमित्र खान ने दावा किया है कि टीएमसी के भीतर असंतोष चरम पर पहुंच चुका है। उनके अनुसार, पार्टी के करीब 50 विधायक और 20 सांसद बीजेपी में शामिल होने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही पार्टी नेतृत्व से अनुमति मिलेगी, ये सभी नेता पाला बदल सकते हैं। इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल, टीएमसी के लिए मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब एक दिन पहले ही राज्य की अलग-अलग नगरपालिकाओं से 101 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। उत्तर बैरकपुर, गारुलिया, कोंटाई, हालिसहार, भटपारा और डायमंड हार्बर जैसे क्षेत्रों के पार्षदों ने अपने पद छोड़ दिए। खास बात यह रही कि डायमंड हार्बर, जिसे टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता है, वहां भी 8 पार्षदों ने इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी। यह वही क्षेत्र है जहां से अभिषेक बनर्जी सांसद हैं। इसी बीच बीजेपी सांसद सौमित्र खान ने टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2021 में बीजेपी कार्यकर्ताओं के घरों पर कार्रवाई करवाई गई थी और अब उन्हीं नेताओं के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। उन्होंने कहा कि गलत काम करने वालों को उसका परिणाम भुगतना ही पड़ता है। हालांकि, टीएमसी ने बीजेपी के इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि बीजेपी केवल अफवाह फैलाने की कोशिश कर रही है और टीएमसी का कोई विधायक या सांसद पार्टी छोड़कर नहीं जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने के लिए झूठे दावे कर रही है। फिलहाल बंगाल की राजनीति में जारी यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। अगर बीजेपी के दावे सही साबित होते हैं तो टीएमसी के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका होगा। वहीं टीएमसी इसे सिर्फ विपक्ष की रणनीति बताकर नुकसान को कम करने की कोशिश कर रही है।