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राहुल गांधी ने कहा: एक साल के भीतर बदल सकती है सरकार

May 24, 2026 Source: Veridhar

राहुल गांधी ने कहा: एक साल के भीतर बदल सकती है सरकार
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बैठक के दौरान केंद्र की मोदी सरकार को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा किया। उन्होंने कहा कि आने वाले एक वर्ष के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार गिर सकती है और उनकी विदाई तय है। राहुल गांधी के अनुसार, देश में बदलते आर्थिक हालात और बढ़ता आर्थिक असंतोष इस संभावित राजनीतिक बदलाव के प्रमुख कारण हो सकते हैं। यह बयान कांग्रेस की अल्पसंख्यक सलाहकार समिति की बैठक के दौरान सामने आया, जहां राहुल गांधी ने मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक दबाव और देश के भीतर लोगों में बढ़ती नाराजगी का असर भारतीय राजनीति पर दिखाई देगा। उनके अनुसार, जनता के बीच असंतोष लगातार बढ़ रहा है, जिसका राजनीतिक परिणाम अगले एक वर्ष में सामने आ सकता है। बैठक में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कुछ नेताओं ने सुझाव दिया कि “मुस्लिम” शब्द के बजाय “अल्पसंख्यक” शब्द का अधिक उपयोग किया जाए। इस पर राहुल गांधी ने असहमति जताई और कहा कि किसी भी समुदाय को संबोधित करने में डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस पार्टी का मूल सिद्धांत यह है कि चाहे हिंदू, दलित, सवर्ण, मुस्लिम, सिख, ईसाई या बौद्ध-जैन समुदाय हो—यदि किसी के साथ अन्याय होता है, तो पार्टी को खुलकर उसके साथ खड़ा होना चाहिए और उनके अधिकारों की आवाज उठानी चाहिए। बैठक के दौरान कुछ नेताओं ने यह भी शिकायत की कि राहुल गांधी अल्पसंख्यक मुद्दों पर तो सक्रिय रूप से बोलते हैं, लेकिन पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता इस तरह के मुद्दों पर उतनी मुखरता नहीं दिखाते। इस पर सुझाव दिया गया कि पार्टी के बाकी नेताओं को भी इन मुद्दों पर अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। इसी बैठक में कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पार्टी को यह धारणा बदलनी होगी कि मुस्लिम समाज केवल बीजेपी को हराने के लिए वोट करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि कांग्रेस को मुस्लिम समुदाय तक यह संदेश पहुंचाना चाहिए कि पार्टी ने उनके हित में कार्य किया है और इसी आधार पर समर्थन मांगा जाना चाहिए, ताकि राजनीतिक ध्रुवीकरण की स्थिति को संतुलित किया जा सके। इसके अलावा बैठक में केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन समुदाय के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया था। इसका उद्देश्य सभी प्रमुख अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना और उनकी समस्याओं एवं सुझावों को साझा मंच पर समझना था। कुल मिलाकर, यह बैठक राजनीतिक बयानबाजी, अल्पसंख्यक राजनीति और संगठनात्मक रणनीति पर केंद्रित रही, जिसमें कांग्रेस ने अपने आगामी राजनीतिक दृष्टिकोण और सामाजिक संदेश को लेकर कई महत्वपूर्ण विचार सामने रखे।