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NCP का बड़ा दावा, “2024 आंदोलन की ताकत दुनिया पहले ही देख चुकी”

May 23, 2026 Source: Veridhar

NCP का बड़ा दावा, “2024 आंदोलन की ताकत दुनिया पहले ही देख चुकी”
बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। 2024 के छात्र आंदोलन से उभरी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान और उनकी पार्टी BNP को लेकर तीखा बयान दिया है। NCP के प्रवक्ता आसिफ महमूद शोजीब भुइयां ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार हिंसा का रास्ता अपनाती है, तो “इस मामले में कोई भी हमसे आगे नहीं निकल सकता।” उनके इस बयान ने देश के राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। NCP का गठन 2024 में हुए बड़े छात्र आंदोलन के बाद हुआ था। इस आंदोलन ने शेख हसीना सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था। आंदोलन के बाद देश में अंतरिम सरकार बनी, जिसकी जिम्मेदारी मुहम्मद यूनुस को सौंपी गई। अंतरिम सरकार का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना था। लंबे समय से शेख हसीना सरकार पर विपक्ष को दबाने और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगते रहे थे, जिसके चलते जनता का असंतोष बढ़ता गया। हालांकि आंदोलन के जरिए राजनीतिक पहचान बनाने वाली NCP को चुनाव में सफलता नहीं मिली। बांग्लादेश की जनता ने तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP को सत्ता सौंपी। चुनावी हार के बाद भी NCP और BNP समर्थकों के बीच तनाव खत्म नहीं हुआ और दोनों पक्षों के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई है। आसिफ महमूद ने अपने बयान में कहा कि अगर यह संघर्ष उन पर थोपा गया, तो यह किसी पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि पूरी नई पीढ़ी के खिलाफ लड़ाई बन जाएगी। उन्होंने शेख हसीना सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछली सरकार ने युवाओं की ताकत को कम आंका था और उम्मीद है कि मौजूदा सरकार वही गलती नहीं दोहराएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2024 के आंदोलन में उनकी ताकत पूरी दुनिया देख चुकी है। यह विवाद झिनाइदाह में हुई हिंसक झड़प के बाद और बढ़ गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, NCP के मुख्य समन्वयक नासिरुद्दीन पटवारी पर एक सभा के दौरान अंडा फेंका गया, जिसके बाद BNP और NCP समर्थकों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। हालात बिगड़ने पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। NCP ने घटना में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। इस बीच, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल पर भी सवाल उठ रहे हैं। कानून-व्यवस्था की स्थिति, भीड़तंत्र और अल्पसंख्यकों खासकर हिंदू समुदाय पर हमलों को लेकर सरकार की आलोचना हुई थी। अब BNP सरकार और NCP के बीच बढ़ती बयानबाजी से बांग्लादेश की राजनीति में फिर अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।